जी हाँ लोकतंत्र के चौथे खम्भे यानि पत्रकारिता जगत में मंदी का दीमक लग्नेलगा है। क्या आप देख प् रहे हैं की किस तरह मंदी के नाम पर रोज दिन मीडिया जगत से लोगों को निकला जा रहा है।
दरसल मंदी का इस्तमाल कैची के रूप में किया जा रहा है। शिकार तो छोटे पत्रकार को होना पड़ रहा है। उचे पड़ पर बैठे लोग तो दुरुस्त हैं। यैसे में इंडिया के कुछ गिने हुए मीडिया हाउस लोगों को निकालने के बजाये बड़े पदों पर बैठे अधिकारीयों के तनख्वा में से कटोती कर रहे है।
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