पिछला साल जैसा भी रहा कम से कम इस साल कुछ बेहतर रहे। न हो बम धमाके, न लोग रहें परेशां। मगर देखिये साल की पहली सुबह बम blast में लोग फिर मरे। पर हम लोग कुछ तो येसा करें की यैसे वारदात न हो।
साल का अमूमन दिन सृजन में बीते।
यह एक ऐसा मंच है जहां आप उपेक्षित शिक्षा, बच्चे और शिक्षा को केंद्र में देख-पढ़ सकते हैं। अपनी राय बेधड़ यहां साझा कर सकते हैं। बेहिचक, बेधड़क।
Friday, January 2, 2009
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शिक्षकीय दुनिया की कहानी के पात्र
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