क्या यह ज़रूरी है की जो भी कूड़ा आप लिखें उसे पढने वाला मिले ही नही बिल्कुल नही सो चिंता किस बात की लिखते जावो लिखने की सच्ची भावना से। अगर यह लालसा मन में होगी तो पाठक न मिलने पर दुःख होना निश्चित है। तो कुछ लोगो को बिना इसकी परवाह किए की कोई पढेगा भी बस लिखना जारी रखना चाहिए।
तभी तो हिम्मत कर के लंबे समय के बात पोस्ट कर रहा हूँ।
यह एक ऐसा मंच है जहां आप उपेक्षित शिक्षा, बच्चे और शिक्षा को केंद्र में देख-पढ़ सकते हैं। अपनी राय बेधड़ यहां साझा कर सकते हैं। बेहिचक, बेधड़क।
Tuesday, April 28, 2009
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शिक्षकीय दुनिया की कहानी के पात्र
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