कुछ तो रह जाती हैं लाख आप या की हम खर्च कर देन सुबह से शाम तक मगर कुछ चीजें हमारे दरमियाँ रह ही जाती हैं जो कभी न तो बात पति हैं और न ही किसी से साझा ही किया जा सकता है।
साहित्य में इसे आप या की हमारा अपना अनुभूत सत्य होता है।
लेकिन कई बार रचनाकार पर गमन करता हुवा कुछ यासी रचना कर डालता है जो उसे कालजई बनादालता है।
इन्ही कुछ रचनाकार में निराला
यह एक ऐसा मंच है जहां आप उपेक्षित शिक्षा, बच्चे और शिक्षा को केंद्र में देख-पढ़ सकते हैं। अपनी राय बेधड़ यहां साझा कर सकते हैं। बेहिचक, बेधड़क।
Saturday, March 14, 2009
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शिक्षकीय दुनिया की कहानी के पात्र
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