हर दस सेकंड में इक आदमी को नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। उस देश या उस आदमी की मनाह्य्स्थाठी क्या होगी आप अंदाजा लगा सकते हैं।
घर में बच्चे की सामत आती होगी , बीवी पिटाई खाती होगी या फिर वह लाइफ को पानी पी पी कर कोसता होगा।
काश उसे ज़िन्दगी में यह दिन न देखने पड़ते। मगर ज़नाब ऋण ले कर घी पीने का मज्जा भी तो अमेरिका ने लिया अब उसके किए का फल यूरोप यसिया सब को भुगतना पड़ रहा है। लोग डरे समाहे ऑफिस जाते हैं कल आयेंगे की नही कुछ पता नही होता।
यस ही हालात लोगो को जीवन समाप्त करने पर मजबुर करता है।
यह दिन भी कट जायेंगे।
नीके दिन जब आयेहे बनत न लाघिये दीर
यह एक ऐसा मंच है जहां आप उपेक्षित शिक्षा, बच्चे और शिक्षा को केंद्र में देख-पढ़ सकते हैं। अपनी राय बेधड़ यहां साझा कर सकते हैं। बेहिचक, बेधड़क।
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शिक्षकीय दुनिया की कहानी के पात्र
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